WHAT IS THE BASIC STRUCTURE OF AAP WHATSAPP PULSE?
Above is the simple format of aap whatsapp pulse.
- the national admin has formed aap national pulse and have added 2-3 admins from each state of india
- the state admins in turn have formed their respective state pulse in their mobile and they have added 2-3 admins from each district / loksabha in their state pulse group.
- now the district admins add people from their district. these members may form tehsil or city or college pulse.
this completes the whole chain.
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THIS CHAIN CAN BE EXTENDED TO ANY LEVEL UPTO EVEN THE BOOTH LEVEL.
the best part of this design is, no one is denied entry to pulse group as there is no limiting number for members.
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THIS CHAIN CAN BE EXTENDED TO ANY LEVEL UPTO EVEN THE BOOTH LEVEL.
the best part of this design is, no one is denied entry to pulse group as there is no limiting number for members.
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HOW PULSE WORKS?
as you see, the pulse groups are giant chain of groups. This is how pulsing is done :
-->the content posted in the national group is seen by all the state admins.
-->they copy it and forward to their own state pulse group.
-->the district admins can see the contents in state group can copy and post it to their own district pulse group.
so the content goes from national -->> state -->>>district/loksabha ---->>>> other pulse groups
Thus our content spreads like fire from kashmir to kanyakumari and kachchh to assam -- WITHOUT HELP OF ANY MEDIA AND WITHOUT SPENDING BIG MONEY !!
YOU CAN SEE THE RED ARROWS SHOWING THE FLOW of PULSE.
WHAT ARE THE TORTURE GROUPS?
as seen in the figure, the national admin has to form aap national torture group, state admin the respective state torture group and district admin the respective district torture group.
why such groups are formed?
the function of the torture groups are to provide the pulsing admins the space for chit chat. whenever any pulse group is formed, the members start chatting. this hampers the pulse function as the important content is not seen by the members due to chatting.
IS THERE ANY FEEDBACK MECHANISM FOR KEEPING A WATCH ON PULSE GROUPS?
YES. The national admin will make team of trusted volunteers to observe the state groups.
Each observer will be given responsibility to observe 5 states.
These volunteers may be anyone that the admin trusts. May be from pulse may not be from pulse. May be from official AAP team may not be from there.
The state admin would be asked to include one such observer in his group.
The observer will not be given any admin rights. His / her sole job would be to keep watching the group activities and report it to the national admin.
Same thing is to be repeated at state level where state admin will select team of observers for his state and ask the district admin to include one of the observer in his group.
Here also the observer would not be given any admin rights.
Such state observer would report to the state admin.
However if the issue of a district group is not resolved at the state level the observer can report it to the national admin.
For state too one observer is expected to observe at least 5 district pulse groups.
So the state admin has to select the number of observer according to the number of districts in his state ÷ 5
DO THE PULSE GROUPS WORK FOR OFFICIAL COMMUNICATION BETWEEN PARTY MEMBERS?
No. pulse groups are public forums and they are not used for important internal party communications. For such communication and any other strategic discussion, the office bearers of AAP form their own secret groups where only dedicated party members are included. such groups are never a part of pulse groups.
हिंदी में जानकारी
ऊपर दिया गया चित्र आप whatsapp पल्स को सादे तरीके से दर्शाता है।
नेशनल एडमिन ने नेशनल ग्रुप बनाया है और उसमे हर राज्य/UT से 2-4 एडमिन जोड़े हैं।
राज्य एडमिन अपने राज्य का पल्स बनाया है और उसमे हर जिले/लोकसभा से 2-3 एडमिन जोड़े हैं।
हर जिले का एडमिन अपने ग्रुप में अपने जिले या लोकसभा से लोगों को अपने ग्रुप में जोड़ता है। ये मेम्बर अपने आसपास, कॉलेज, तहसील या अन्य लोगों को जोड़ कर अपना ग्रुप बना सकते हैं।
इस तरह आप whatsapp पल्स ली चेन पूरी होती है।
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इस चेन को बूथ लेवल/कॉलोनी लेवल तक ले जाया जा सकता है।
पल्स के मेंबर्स वाले ग्रुप में किसी को भी जोड़ने से मना नहीं किया जाता है। और कितने भी लोगों को जोड़ा जा सकता है। जरुरत पड़ने पर और ग्रुप बनाए जा सकते हैं।
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पल्स काम कैसे करता है?
इस चित्र में पल्स ग्रुप की चेन को दिखाया गया है। किसी भी सूचना की पल्स इस तरह की जाती है:
सूचना को नेशनल ग्रुप में पोस्ट किया जाता है जिसे राज्य एडमिन देखते हैं।
राज्य एडमिन उस सूचना को अपने अपने राज्य पल्स ग्रुप में पोस्ट करते हैं।
वहां पर जिला एडमिन उसे अपने अपने मेंबर्स ग्रुप में पोस्ट करते हैं।
इस तरह से सूचना सभी जगह, कश्मीर से कन्याकुमारी, कच्छ से असम तक फ़ैल जाती है। और वो भी बिना पैसा खर्च किये या फिर बिना मीडिया की सहायता के।
आप चित्र में लाल तीर के निशान से सूचना का प्रवाह देख सकते हैं।
टार्चर ग्रुप क्या हैं?
नेशनल एडमिन नेशनल टार्चर ग्रुप बनाता है। राज्य एडमिन राज्य टार्चर ग्रुप बनाता है। इसी तरह जिला या और तहसील टार्चर ग्रुप बनाए जाते हैं।
ये टार्चर ग्रुप क्यों बनाए जाते हैं?
टार्चर ग्रुप का मुख्य मकसद चैटिंग के लिए अलग जगह मुहैया करवाना है। आम तौर पर पल्स ग्रुप में मेम्बर चैटिंग करने लगते हैं। जिस से ज्यादा मेसेज होने से जरुरी सूचना मिस होने का खतरा रहता है। इसीलिए चैटिंग के लिए अलग ग्रुप बनाए जाते हैं।
क्या पल्स ग्रुप के काम काज पर नजर रखने और उसका फीडबैक लेने के लिए कोई विधि है?
जी हाँ। इसके लिए नेशनल एडमिन विश्वसनीय वालंटियर्स को आब्जर्वर नियुक्त करता है।
हर आब्जर्वर को 5 राज्य पल्स ग्रुप्स की जिम्मेदारी दी जाती है।
हर राज्य एडमिन को नेशनल एडमिन द्वारा नियुक्त आब्जर्वर को अपने ग्रुप में ऐड करने के लिए कहा जायेगा।
आब्जर्वर को कोई एडमिन अधिकार नहीं दिए जायेंगे। आब्जर्वर का काम है ग्रुप की गतिविधियों पर नज़र रखना और जरुरत पड़ने पर नेशनल एडमिन/राज्य एडमिन को सूचित करेगा।
इसी तरह राज्य एडमिन अपने ग्रुप्स के लिए आब्जर्वर नियुक्त करेगा और जिला ग्रुप एडमिन को राज्य एडमिन द्वारा नियुक्त आब्जर्वर को अपने ग्रुप में ऐड करने के लिए कहेगा। यहाँ भी आब्जर्वर को कोई एडमिन अधिकार नहीं दिए जायेंगे।
ये राज्य आब्जर्वर राज्य एडमिन को सूचित करेंगे। पर अगर किसी कारण से राज्य स्तर पर प्रॉब्लम का हल नहीं हो पाता है तो वो नेशनल एडमिन को सूचित करेगा।
राज्य के लिए भी एक आब्जर्वर को 5 ग्रुप ओब्सेर्व करने के लिए जिम्मेदारी दी जाएगी। राज्य एडमिन अपने जरुरत मुताबिक आब्जर्वर नियुक्त कर सकता है
क्या पल्स ग्रुप्स पार्टी की अंदरुनी बातचीत के लिए काम करते है?
जी नही. पल्स ग्रुप में पार्टी की अंदरुनी बातचीत नहीं हो सकती क्योकि ये ग्रुप पब्लिक ग्रुप्स है. अंदरुनी बातचीत के लिए पार्टी के मेंबर्स अपना सीक्रेट ग्रुप बनाते है जिसमे सिर्फ पार्टी के मेंबर्स ही होते है जबकि पल्स ग्रुप का मेंबर तो कोई भी बन सकता है. विरोधी पार्टी का मेंबर भी पल्स ग्रुप का मेंबर बन सकता है.
So the state admin has to select the number of observer according to the number of districts in his state ÷ 5
No. pulse groups are public forums and they are not used for important internal party communications. For such communication and any other strategic discussion, the office bearers of AAP form their own secret groups where only dedicated party members are included. such groups are never a part of pulse groups.
हिंदी में जानकारी
ऊपर दिया गया चित्र आप whatsapp पल्स को सादे तरीके से दर्शाता है।
नेशनल एडमिन ने नेशनल ग्रुप बनाया है और उसमे हर राज्य/UT से 2-4 एडमिन जोड़े हैं।
राज्य एडमिन अपने राज्य का पल्स बनाया है और उसमे हर जिले/लोकसभा से 2-3 एडमिन जोड़े हैं।
हर जिले का एडमिन अपने ग्रुप में अपने जिले या लोकसभा से लोगों को अपने ग्रुप में जोड़ता है। ये मेम्बर अपने आसपास, कॉलेज, तहसील या अन्य लोगों को जोड़ कर अपना ग्रुप बना सकते हैं।
इस तरह आप whatsapp पल्स ली चेन पूरी होती है।
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इस चेन को बूथ लेवल/कॉलोनी लेवल तक ले जाया जा सकता है।
पल्स के मेंबर्स वाले ग्रुप में किसी को भी जोड़ने से मना नहीं किया जाता है। और कितने भी लोगों को जोड़ा जा सकता है। जरुरत पड़ने पर और ग्रुप बनाए जा सकते हैं।
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पल्स काम कैसे करता है?
इस चित्र में पल्स ग्रुप की चेन को दिखाया गया है। किसी भी सूचना की पल्स इस तरह की जाती है:
सूचना को नेशनल ग्रुप में पोस्ट किया जाता है जिसे राज्य एडमिन देखते हैं।
राज्य एडमिन उस सूचना को अपने अपने राज्य पल्स ग्रुप में पोस्ट करते हैं।
वहां पर जिला एडमिन उसे अपने अपने मेंबर्स ग्रुप में पोस्ट करते हैं।
इस तरह से सूचना सभी जगह, कश्मीर से कन्याकुमारी, कच्छ से असम तक फ़ैल जाती है। और वो भी बिना पैसा खर्च किये या फिर बिना मीडिया की सहायता के।
आप चित्र में लाल तीर के निशान से सूचना का प्रवाह देख सकते हैं।
टार्चर ग्रुप क्या हैं?
नेशनल एडमिन नेशनल टार्चर ग्रुप बनाता है। राज्य एडमिन राज्य टार्चर ग्रुप बनाता है। इसी तरह जिला या और तहसील टार्चर ग्रुप बनाए जाते हैं।
ये टार्चर ग्रुप क्यों बनाए जाते हैं?
टार्चर ग्रुप का मुख्य मकसद चैटिंग के लिए अलग जगह मुहैया करवाना है। आम तौर पर पल्स ग्रुप में मेम्बर चैटिंग करने लगते हैं। जिस से ज्यादा मेसेज होने से जरुरी सूचना मिस होने का खतरा रहता है। इसीलिए चैटिंग के लिए अलग ग्रुप बनाए जाते हैं।
क्या पल्स ग्रुप के काम काज पर नजर रखने और उसका फीडबैक लेने के लिए कोई विधि है?
जी हाँ। इसके लिए नेशनल एडमिन विश्वसनीय वालंटियर्स को आब्जर्वर नियुक्त करता है।
हर आब्जर्वर को 5 राज्य पल्स ग्रुप्स की जिम्मेदारी दी जाती है।
हर राज्य एडमिन को नेशनल एडमिन द्वारा नियुक्त आब्जर्वर को अपने ग्रुप में ऐड करने के लिए कहा जायेगा।
आब्जर्वर को कोई एडमिन अधिकार नहीं दिए जायेंगे। आब्जर्वर का काम है ग्रुप की गतिविधियों पर नज़र रखना और जरुरत पड़ने पर नेशनल एडमिन/राज्य एडमिन को सूचित करेगा।
इसी तरह राज्य एडमिन अपने ग्रुप्स के लिए आब्जर्वर नियुक्त करेगा और जिला ग्रुप एडमिन को राज्य एडमिन द्वारा नियुक्त आब्जर्वर को अपने ग्रुप में ऐड करने के लिए कहेगा। यहाँ भी आब्जर्वर को कोई एडमिन अधिकार नहीं दिए जायेंगे।
ये राज्य आब्जर्वर राज्य एडमिन को सूचित करेंगे। पर अगर किसी कारण से राज्य स्तर पर प्रॉब्लम का हल नहीं हो पाता है तो वो नेशनल एडमिन को सूचित करेगा।
राज्य के लिए भी एक आब्जर्वर को 5 ग्रुप ओब्सेर्व करने के लिए जिम्मेदारी दी जाएगी। राज्य एडमिन अपने जरुरत मुताबिक आब्जर्वर नियुक्त कर सकता है
जी नही. पल्स ग्रुप में पार्टी की अंदरुनी बातचीत नहीं हो सकती क्योकि ये ग्रुप पब्लिक ग्रुप्स है. अंदरुनी बातचीत के लिए पार्टी के मेंबर्स अपना सीक्रेट ग्रुप बनाते है जिसमे सिर्फ पार्टी के मेंबर्स ही होते है जबकि पल्स ग्रुप का मेंबर तो कोई भी बन सकता है. विरोधी पार्टी का मेंबर भी पल्स ग्रुप का मेंबर बन सकता है.




